Save 25% Sitewide. Click Here



पुरुष तन में फँसा मेरा नारी मन

Author: Orient Paperbacks
ISBN: 9789386534521 | Weight: 130 g

Regular price ₹ 225

अपनी असल पहचान स्थापित करने की एक ट्रांसजेंडर के साहसपूर्ण संघर्ष की अद्भुत जीवन-यात्रा जो 23 सितम्बर, 1964 में शुरू होती है जब दो बेटियों के बाद चित्तरंजन बंद्योपाध्याय के घर बेटा पैदा हुआ। बेटे सोमनाथ के जन्म के साथ ही पिता के भाग्य ने बेहतरी की ओर तेज़ी से ऐसा कदम बढ़ाया कि लोग हँसते हुए कहते कि अक्सर बेटियाँ पिता के लिए सौभाग्य लाती हैं लेकिन इस बार तो बेटा किस्मत वाला साबित हुआ। वे कहते, ‘चित्त यह पुत्र तो देवी लक्ष्मी है। सोमनाथ जैसे-जैसे बड़ा होता गया उसमें लड़कियों जैसी हरकतें, भावनाएँ पैदा होने लगी और लाख कोशिश करने के बाद भी रुक या दब नहीं सकीं।

बिना माँ-बाप को बताये वह घर छोड़ कर निकल पड़ा-नारी बनने के लिए। कहाँ, कैसे वह नर से नारी बना, सोमनाथ से मानोबी बन पीएच.डी. तक उच्चतम शिक्षा पाई और 9 जून 2015 को पश्चिम बंगाल के कृशनगर महिला कॉलेज की प्रिंसिपल बनी। यह एक ऐसी मिसाल है जो हर ट्रांसजेंडर के लिए प्रेरणा स्रोत है।

Book Details:
Transliteration: Purush Tan Mein Phansa Mera Nari Man
Author: Manobi Bandyopadhyay | मानोबी बंधोपाध्याय
Language: Hindi
Pages: 160
Format: Paperback
ISBN-13: 9789386534521