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मैं और मेरा पाकिस्तान

Author: Imran Khan
ISBN: ORNT-9788122205688 | Weight: 350 g

Regular price ₹ 325

पाकिस्तान बनने के केवल 5 साल बाद जन्में इमरान ख़ान ने अपने देश के इतिहास को बनते और बिगड़ते देखा है; इसी इतिहास में बुना है उनका अपना जीवन - लाहौर में ख़ुशियों भरा बचपन, ऑक्स्फ़र्ड यूनिवर्सिटी में उच्च शिक्षा, एक बेमिसाल क्रिकेट करीयर, जेमिमा के साथ विवाह और तलाक, अपने धर्म और देश की खोज, राजनैतिक जीवन का आरम्भ और उनके आदर्श एवं सपने।

यादों के आईने से इमरान अपने देश के संक्षिप्त इतिहास को बताते हुए उन घटनाओं पर ध्यान केन्द्रित करते हैं जिन्होंने आज के पाकिस्तान और इस्लामिक संसार को आकार दिया है - 1965 और 1971 में भारत के साथ युद्ध, 1979 की ईरान-क्रान्ति, सोवियत संध का अफ़गानिस्तान पर आक्रमण, 9/11 का आतंकी हमला और अमेरिका का बदला, ओसामा बिन लादेन का पाकिस्तान में पाये जाना और उसकी हत्या एवं अफ़गानिस्तान में एक न ख़त्म होने वाली विवादास्पद लड़ाई।

सारी इस्लामिक दुनिया में पाकिस्तान परमाणु बम वाला एकमात्र देश है पर फिर भी नियमित आतंकी बमबारी और अमेरिका के ड्रोन हमलों से अपने लोगों को बचाने में असमर्थ है।

इस अस्थिरता और अन्याय के चरम बिन्दु पर पाकिस्तान कैसे पहुंचा और उसके साधारण नागरिक अपने और देश के बारे में क्या सोचते हैं....

पाकिस्तान इतिहास के इस जद्दोजहेद भरे खेल को जानने-समझने के लिए एक विशिष्ठ और महत्वपूर्ण पुस्तक।

Book Details:
Transliteration: Main Aur Mera Pakistan
Format: Paperback
Language: Hindi
Author: Imran Khan

Author

इमरान ख़ान का जन्म 1952 में लाहौर, पाकिस्तान में हुआ, वहीं वह क्रिकेट खेलते हुए बड़े हुए और फिर उच्च शिक्षा के लिए ऑक्स्फ़र्ड यूनिवर्सिटी, इंग्लैंड, में दाख़िला लिया। 1971 में उन्होंने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेला; 1982 में वह पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के कैप्टन बने और 1992 तक पाकिस्तान के लिए खेलते रहे।

अपने क्रिकेट करियर के अंत के कुछ वर्ष बाद 1996 में इमरान ख़ान ने 'न्याय, मानवता और आत्म-सम्मान' के प्रस्तावित नारे के साथ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ नामक अपनी राजनैतिक पार्टी की स्थापना करी जिसका उद्येश्य पाकिस्तान को एक ऐसी भ्रष्टाचार-मुक्त और न्यायप्रिय शासन प्रणाली देना है जिससे हर नागरिक आत्म-सम्मान से जी सके।

Praise

"एक मुखर और दिलचस्प आत्मकथा जिसे आप उठाकर छोड़ न सकेंगे। पाकिस्तानी जीवन और राजनीति की खरी और अनकही सच्ची कहानी..."

- स्पेकटेटर, इंग्लैण्ड

"एक अत्यन्त महत्वपूर्ण पुस्तक... लालची और 'डॉलरों का आदी' राजनैतिक वर्ग, आज्ञाकारी न्यायपालिका, भ्रष्टाचार से संतृप्त पुलिस और राजनैतिक प्रणाली - जिससे पाकिस्तान के पर्यवेक्षक अपरिचित नहीं हैं - का एक स्वाभिमानी पश्तून और देश-प्रेमी पाकिस्तानी द्वारा खुलासा। लेखक के शब्दों में तत्कालिता का सन्देश है... पाकिस्तान तेज़ी से असफल हो रहा राज्य है जो किसी भी वक्त विफल हो सकता है।"

- दि इंडीपेन्डेन्ट, इंग्लैंड

"बड़ी सहजता से इमरान ने अपने जीवन की कहानी में पाकिस्तान के इतिहास को बना है। देश के कुलीन वर्ग ने किस प्रकार एक के बाद एक उन आदर्शों और सिद्धान्तों के साथ विश्वासघात किया और उनका मज़ाक उड़ाया जिन पर पाकिस्तान का जनम हुआ था। ... (यह पुस्तक) पाकिस्तान के लिए एक राजनैतिक सुनीमा के समान है।"

- प्रो शाहिद आलम, नार्थ ईस्टर्न यूनिवर्सिटी, यू. एस. ए

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