हिन्दी साहित्यकारों की व्यक्तिगत डायरियों के प्रकाशन की परम्परा प्रायः नहीं के बराबर है, और इस दृष्टि से निश्चय ही साहित्य में आधुनिक बोध के एक अग्रणी कृतिकार मोहन राकेश की यह डायरी एक दिशादर्शी प्रकाशन है। साहित्यिक जीवन के आरंभ से ही वे प्रायः नियमित रूप से डायरी लिखते रहे जिसमें उनकी अपनी व्यक्तिगत विकास-यात्रा तो विस्तार से चित्रित हुई ही, उनके परिवेश, मित्रगण, प्रेम-प्रसंग, साहित्यिक गतिविधि तथा नई कहानी आन्दोलन का अन्तरंग विवरण भी प्रस्तुत होता रहा।
1948 से 1968 तक का कालखंड अपने भीतर समेटे यह आधुनिक हिन्दी साहित्य का दस्तावेज है।
Choose a currency below to display product prices in the selected currency.