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भारती का सपूत

Price:
Rs 100.00
ISBN:
9788170285045
Publisher:
Rajpal and Sons
Language:
Hindi
Pages:
128
Weight:
265.00 Grams
Rating:
( )
Quantity:
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About The Book

हिन्दी के प्रख्यात साहित्यकार रांगेय राघव ने विशिष्ट कवियों, कलाकारों और चिन्तकों के जीवन पर आधारित उपन्यासों की एक माला लिखकर साहित्य की एक बड़ी आवश्यकता को पूर्ण किया है। प्रस्तुत उपन्यास हिन्दी के निर्माताओं में एक, भारतेन्दु हरिशचन्द्र, के जीवन पर आधारित अत्यन्त रोचक और मौलिक रचना है।

भारतेन्दु पर हरिशचन्द्र आधुनिक हिन्दी के पितामह माने जाते हैं। महाकवि जगन्नाथ दास 'रत्नाकर' ने उन्हें 'भारती का सपूत' कहा था। उन्नसवीं शताब्दी मे मध्य में जब वे हुए, अवधी और ब्रजभाषा से बाहर निकरकर दैनंदिन प्रयोग की सरल खड़ी बोली का निर्माण हो रहा था। भारतेन्दू ने विविध प्रकार की रचनाएँ देकर इसको गति प्रदान की और इसका भावी स्वरूप सुनिशचित किया। वे धनी परिवार की सन्तान थे और सामान्ती जीवन की सभी अच्छाइयों और बुराइयों का शिकार थे। वे 34 वर्ष की अल्पायु में ही तपेदिक से दिवंगत हो गए। परन्तु इतने समय में ही उन्होंने इतना कुछ कर दिया जो आज तक चला आ रहा है।

भारतेन्दु का व्यक्तित्व भी बड़ा रंगीला और रोचक था। लेखक रांगेय राघव इतिहास के गहरे विद्वान और आग्रही हैं, इसलिए उनके द्वारा प्रस्तुत यह चित्रण पठनीय होने के साथ ही इतिहाससम्मत और सत्य के बहुत समीप भी है।


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