जीवन-साथी... अर्थात् पति-पत्नी दोनों की तुलना रथ के दो पहियों से की जाती है। रथ के दोनों पहियों के बीच ठीक-ठीक तालमेल और संतुलन होता है तभी यात्रा सुखद और सफल होती है
जीवन साथी का चुनाव कैसे करे की दाम्पत्य जीवन सुखद और सफल हो?
हिंदी के यशस्वी लेखक सत्यकाम विद्यालंकार ने इसी विषय पर बड़ी रोचक शैली में प्रकाश डाला है। एक अत्यंत जीवनोपयोगी पुस्तक, जिसे उपहारस्वरूप भी दिया जा सकता है।
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