जनरल वी॰ पी॰ मलिक कारगिल युद्ध के दौरान भारत की थलसेना के अध्यक्ष थे। उनसे बेहतर यह कोई नहीं जानता कि वे कौन-सी परिस्थितियाँ थीं, जिन्होंने कारगिल युद्ध को अपरिहार्य बनाया तथा इस युद्ध को भारत की शानदार जीत तक ले जाने में सेना ने क्या-क्या रणकौशल अपनाए, कैसी-कैसी कुर्बानियाँ दीं। इस पुस्तक में जनरल मलिक ने पहली बार कारगिल युद्ध के विस्तृत रहस्योद्घाटन किए हैं। हमारे खुफिया और निगरानी-विभागों की आक्रामकता के बजाय सहनशीलता और सीमित मुठभेड़ों की रणनीति जैसे अनेक आक्षेपों के जवाब भी जनरल मलिक ने इसमें विस्तार से दिए हैं। दुर्लभ जानकारियों से भरी एक विचारोत्तेजक पुस्तक, जिसे हर जागरूक भारतीय पढ़ना चाहेगा।
पाकिस्तान के साथ हुए युद्धों में 'कारगिल' सबसे कठिन और ताजा युद्ध है। जब पाकिस्तान ने धोखे से, चोरी-छिपे, कारगिल की दुर्गम पहाड़ियों के एक बड़े हिस्से पर अपनी चौकियां बना ली थीं, तब कैसे भारत की थलसेना के वीर जवानों ने और हमारी वायुसेना ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को वहाँ से खदेड़ा, पूरी तरह परास्त किया और फिर से सारी भूमि पर अपना तिरंगा फहराया। युद्धों के इतिहास में यह एक अभूतपूर्व विजय है। इस हिंदी संस्करण का विशेष आकर्षण है, पाकिस्तान के डिक्टेटर परवेज़ मुशर्रफ की हाल ही में प्रकाशित हुई पुस्तक 'इन द लाइन ऑफ़ फ़ायर' में किये गये झूठे दावों का मुहँतोड़ उत्तर, जो इस पुस्तक के लेखक जनरल वी॰ पी॰ मलिक ने दिया है - पूरे प्रमाणों के साथ।
भारत-पाक संबंधों और काशमीर की समस्या को समझाने के लिए यह पुस्तक एक आवश्यक दस्तावेज़ है।
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