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वाल्मीकीय रामायण
अनुवादकः डॉ॰ रामचन्द्र वर्मा शास्त्री
ISBN-10: 81222XXXX1
Format: Paperback
Publisher: Orient Paperbacks
Language: Hindi
Pages: 396
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Price: INR 250 | OFFER Price: INR 225
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संस्कृत के तीन ग्रन्थों - 'वाल्मीकीय रामायण', 'महाभारत' और 'श्रीमदभागवत पुराण'- को उपजीव्य ग्रन्थ माना जाता है। उपजीव्य शब्द का अर्थ है-परवर्ती कवियों द्वारा प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप में इन रचनाओं से प्रभावित होना। इन तीनों ग्रन्थों में 'वाल्मीकीय रामायण' का प्रभाव सर्वाधिक है। स्वयं व्यासजी ने 'महाभारत' में पाण्डवों को वाल्मीकीय रामायण का रामोपाख्यान सुनाकर बताया है कि संकट सब पर पड़ता है और संकट में ही धैर्य की परीक्षा होती है। 'श्रीमदभागवत पुराण' में भी रामावतार का वर्णन है।

संस्कृत भाषा में 'वाल्मीकीय रामायण' को काव्य, 'महाभारत' को इतिहास तथा 'श्रीमदभागवत पुराण' को धर्मग्रन्थ माना जाता है जिसका स्पष्ट अर्थ है कि वर्णन की जैसी सुन्दरता एवं मोहकता 'वाल्मीकीय रामायण' में उपल्ध हैं, वैसी अन्य ग्रन्थों में नहीं है। यहां तक कि व्यास, कालिदास और गोस्वामी तुलसीदास-जैसे कवियों ने भी महर्षि वाल्मीकि के काव्य से प्रभावित होने और उनके ऋण को स्वीकार करने में संकोच नहीं किया है।

अपनी जन्मभूमि को जननी के समकक्ष और स्वर्ग से भी अधिक सुखकर मानने की भावना सर्वप्रथम इसी ग्रन्थ में मुखरित हुई हैं।

ऎसे अमूल्य ग्रन्थरत्न का हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत है।


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